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Z plus Security ? जेड श्रेणी सुरक्षा क्या होती है ?

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की z plus Security हटाये जाने के बाद एक राजनितिक भूचाल सा आ गया है. लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज़ यादव ने तो इसके लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया और उनके लिए अपशब्दों को इस्तेमाल भी किया

देश के प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द कहे जाने के बाद राजनितिक गलियारों में खलबली मच गयी. और तेज़ प्रताप यादव के खिलाफ बीजेपी शासित राज्यों में बीजेपी के छोटे नेताओ ने धड़ धड अलग अलग थानों में प्राथमिकी पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवा दी.

जानिए क्या होती है Z plus Security ?

सरकार की तरफ से दी जाने वाली Z plus Security एक खास तरह की सिक्यूरिटी होती है. ज़ेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा देश की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है. यह वीवीआईपी श्रेणी की सुरक्षा मानी जाती है. इस श्रेणी की सुरक्षा में 36 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. इसमें एनएसजी और एसपीजी के कमांडो शामिल रहते हैं.

इस सुरक्षा में पहले घेरे की ज़िम्मेदारी एनएसजी की होती है जबकि दूसरी परत एसपीजी कमांडो की होती है. इसके अलावा आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान भी ज़ेड प्लस सुरक्षा श्रेणी में शामिल रहते हैं.

भारत सरकार की तरफ़ से मुहैया की जाने वाली सभी तरह की सुरक्षा में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी), नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (एनएसजी), इंडियन-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स(सीआरपीएफ) एजेंसियां शामिल होती हैं.

कितने प्रकार की होती है सुरक्षा?

भारत में नेताओं या बड़ी शख्सियतों को आम तौर पर ज़ेड प्लस, ज़ेड, वाई और एक्स श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाती है.

इनमें केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, मशहूर नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं.

फिलहाल भारत में 450 लोगों को इस तरह के सुरक्षा मिली हुई है.

कैसी होती है ज़ेड और वाई श्रेणी की सुरक्षा ?

ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा में सुरक्षाकर्मियों की संख्या 22 होती है. इस श्रेणी में आईटीबीपी (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल) के जवान और अधिकारी सुरक्षा में लगाए जाते हैं.

इस श्रेणी की सुरक्षा में एस्कॉर्ट्स और पायलट वाहन भी दिए जाते हैं.

जबकि वाई श्रेणी में यह संख्या घटकर 11 हो जाती है. जिनमें दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफीसर्स (पीएसओ) शामिल होते हैं.

एक्स कैटगरी में मात्र 2 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं जिनमें एक पीएसओ शामिल होता है.

कैसी होती है प्रधानमंत्री की सुरक्षा?

प्रधानमंत्री की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानि एसपीजी के पास होती है. प्रधानमंत्री के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिजनों को भी कुछ वक़्त के लिए यह सुरक्षा मिलती है.

साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ साल बाद 1988 में एसपीजी का गठन हुआ था. एसपीजी का सालाना बजट 300 करोड़ रुपये से अधिक है और इसे देश की सबसे महंगी और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था माना जाता है.

फिलहाल देश में सिर्फ 8 लोगों को यह सुरक्षा मिली हुई है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, उनकी पत्नी गुरशरण कौर, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्या, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका वाड्रा शामिल हैं.

फ़िलहाल भारत के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अम्बानी को भी जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला लिया गया है हालाँकि इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है.

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