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Indian Foreign Policy Hindi-मोदी की विदेश निति में आज का भारत

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Indian Foreign Policy Hindi : क्या विदेश नीति भी फ्लॉप हो रही है ?

Modi Foreign Policy Hindi: पड़ोसी देशो से सम्बन्ध कोई ठीक नहीं है। यहाँ तक की नेपाल जिसे लगभग इंडिया का ही हिस्सा समझा जाता रहा वोह भी चीन की गोद में जा कर बेठ गया है , हमारे प्रधान सेवक महोदय आधे से ज्यादा विश्व का भ्रमण कर चुके है और विश्व के बड़े बड़े नेताओं को पछाड़ते हुए भारत को विश्वगुरु बना रहे है. मौजूदा सरकार की विदेश निति साफ़ दिखाई दे रही है की ऐसे देशों से सम्बन्ध ज्यादा अच्छे बनाएं जायें जो विकसित है. और पड़ोसियों से सम्बन्ध चाहे बिगड़े या सुधरे उस ओर ध्यान ही नहीं दिया जाए.
Indian Foreign Policy Hindi-चीन ने पिछले एक महीने से ऊँगली नहीं बल्कि डंडा चला रखा है, सीमा पर चीन की हरकत गन्दी होती जा रही है और भारत से उलझने का मन बना बैठा है. चीन की इतनी हिम्मत इसलिए भी हो गयी की उसे मालूम चल गया है. भारत पहले से ही सांप्रदायिक गृह युद्ध से जूझ रहा है और सरकार को सपोर्ट करने वाले सांप्रदायिक दल कभी भी भारत को एक नहीं होने देंगे और भारत की जनता एक सुर में मोदी के सुर से सुर नहीं मिलाएगी.  लेकिन सरकार को समझ ही नहीं आ रहा की क्या करें , लेकिन एक बात सरकार को सबसे पहले समझ आ गई की दुनिया की सबसे राष्ट्रीयवादी मीडिया,  हमारी मीडिया को समझा दिया जाये की रिपोर्टिंग कैसे करनी है  इसलिए सरकार ने मीडिया को एडवाइजरी जारी कर दी होगी की ज़रा संभल कर रिपोर्टिंग करे और सय्यम बरते अभी सय्यम बचा कर रखे ताकि पाकिस्तान के वक्त़ खोने के काम आये , इस एडवाइजरी के जारी होते है सबसे बड़े राष्ट्रीयवादी पत्रकारों  का देशभक्ति का भूत उनके पैतृक गांव के पीपल के पेड पर जा कर बेठ गया है और उसने वादा किया है की वोह तब तक वापिस नहीं आएगा जब तक की चाइना वाला मामला  ठंडा न हो जाये।
Indian Foreign Policy Hindi: अगर ऐसा नहीं होता तो सुधीर चौधरी और अर्नब जैसे पत्रकार  अभी तक सेम टू सेम वैसा ही पोल अपने चैनल पर करा चुके होते जैसा 8-9 महीनो पहले कराया था “लाइव आप बताइये देश की जनता की क्या  भारत को चीन युद्ध कर लेना चाहिए और बीजिंग पर तिरंगा लहरा देना चाहिए।
Indian Foreign Policy Hindi : उम्मीद का आसरा अब दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीयवादी संस्था RSS पर था , उम्मीद की जा रही थी कि RSS और सहयोगी दल मिलकर चीन को जवाब देंगे  लेकिन RSS ने अचानक अपना आदर्श गोडसे से शिफ्ट करके महात्मा गाँधी पर कर लिया है और अहिंसा के रास्ते  पर चलने का फैसला लेते हुए देश की जनता से अपील की है की जनता मन्त्रों का जाप करे प्राथना और दुआ करे ताकि चीन अपने आप ही हार मान कर चीन को इंडियन का अभिंग अंग घोषित कर दे और पूरा विश्व नरेन्द्र मोदी  जी को अपना नेता भी मान ले।
Indian Foreign Policy Hindi : इसी बीच सरकार ने एक बहुत इम्पोर्टेन्ट व्यक़्ती की तलाश शुरू कर दी है।2014 के चुनाव के बाद यह जनाब दिल्ली मेट्रो में यह कहते हुए पाए गए थे की अब मोदी जी pm है, चीन भीगी बिल्ली हो जायेगा और अगर युद्ध हुआ भी तो चीनी सिपाहियों को जेब में रख कर ले आयेगें छोटे छोटे से तो होते ही है। सरकार चाहती है की यह जनाब यह तक्नीक सभी को सिखाये की कैसे चीनी सिपाहियों को जेब में रख कर लाया जा सकता है ताकि RSS की मन्त्रों जाप वाली तक्नीक के साथ साथ इसका उपयोग भी किया जा सके.
Indian Foreign Policy Hindi : इन्ही सब के बीच कुछ ज़्यादा राष्ट्रीयवादी लोगो ने चीन को मुँह तोड़ जवाब देने का फैसला किया और अपने इरादे बुलंद करते हुए हिंदुस्तान की उन व्यपारिओं की दुकानों में तोड फोड की जो चीन का सामान बेचते है , इसे कहते है दूसरे देश को जवाब देना,  मैं  इनकी सोच-समझ  का क़ायल हूँ। बडी मुश्किल से ऐसे समझदार लोग पैदा होते है जो दुश्मन देश को हारने के लिए अपने ही देश के लोगो के साथ मारपीट करते है और उनकी दुकानों में तोड़ फोड़ कर उनका नुक्सान कर समझते है की उहोने दुश्मन देश का नुक्सान किया है. और इससे चीन जैसा ताकतवर दुश्मन हार जायेगा.
देश को इन टुच्चे राष्ट्रीयवादी लोगो की क़दर करनी चाहिए। एक खबर आई की सरकार ने एक शांति दूत चीन भेजा है ताकि मामला बात चित से हल किया जा सके। यह मुझे थोडा सुकून देने वाली खबर है , इसलिए की मैं उन लोगो में से हूँ जो जंग, वॉर ,युद्ध के खिलाफ है। यही अच्छी बात है की हर मसला बात चित से हल हो जाये। लेकिन यह बात कुछ बडे मंत्री और उपराष्ट्रपति पद के दावेदार जैसे लोगो को भी समझनी चाहिए. ऐसा नहीं होना चाहिए की अपना गियर देश की ताक़त को देख कर शिफ्ट करलो। देश कमज़ोर हो तो वीरप्रताप का चोला ओढ़ कर पुराने युद्ध याद दिलाओ और देश ताक़तवर हो तो अपनी 5000 साल पूरानी शांति की सभ्यता का लिबास पहन कर शांति दूत बन जाओ।
किसी ने कहा की इंडियन आर्मी के पास 10 दिन से ज़्यादा का असला नहीं है। तो भाई मेरे इसमे घबराने की बात नहीं है , आज जिस प्रकार के घातक हथियार हमारे देश के पास हैं वैसे  सभी देशो के पास है , जो तकनीक सभी देशो के पास है यह युद्ध 4-5 दिन में ही ख़्तम हो जायेगा। 4-5 दिन में ही दोनों देश एक दुसरे में इतनी तबाही मचा चुके होंगे कि 10 दिन से ज्यादा के गोला बारूद की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी, इतने बेगुनाह दोनों तरफ मर चुके होंगे की फिर दोनों देशो की सरकारों को समझ आजायेगा की बात चित से हल कर लेते है ,फिर हज़ारो लोगो की लाश पर एक शांति की टेबल लगा कर समझौते कर लिए जायेगें।
युद्ध जीते कोई भी लेकिन हारते वोह लोग है जो अपना सब कुछ अपने अज़ीज़ यद्ध में खो देते है
युद्ध जंग वॉर सिर्फ और सिर्फ तबाही देते है और कुछ नहीं
abchindiPost के लिए गेस्ट पोस्ट
द्वारा :
..Zaki Ansari✍?

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