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Hindi Movie Raees Boycott-अब फिल्मे भी सांप्रदायिक होने लगी

Hindi Movie Raees Boycott– देश में साम्प्रदायिकता अपने चरम पर पहुच चुकी है अब फिल्मे भी सांप्रदायिक होने लगी है, अक्सर देखा जा रहा है की कला, आर्ट, अभिनय और संगीत भी अब देश में सांप्रदायिक हो गए है, हाल ही में न्यू रिलीज़ मूवी ‘रईस’ देखने के बाद सर अमिताभ बच्चन ने शाहरुख़ खान की एक्टिंग की तारीफ क्या कर दी, सोशल मीडिया पर लोगो ने उनकी बैंड बजा डाली, सोशल मीडिया पर उन्हें भला बुरा कहा गया है, यदि आप अमिताभ बच्चन साहब का ट्विटर पेज @SrBachchan को चेक करेंगे तो आपको पता चलेगा की किस प्रकार की मानसिकता देश में जन्म ले रही है,

Hindi Movie Raees : ऐसा नहीं है की सर अमिताभ बच्चन साहब ने सिर्फ रईस फिल्म में शाहरुख़ के काम को अच्छा बताया उन्होंने रईस फिल्म के साथ रिलीज़ हुई काबिल फिल्म की भी तारीफ की और ऋतिक रोशन के काम की भी तारीफ की, एक कलाकार ने कलाकार होते हुवे अपना धर्म निभाया किन्तु सोशल मीडिया उनका कुछ लोगो ने इस लिए विरोध किया की उन्होंने शाहरुख़ की फिल्म को अच्छा क्यूं कहा, आजकल सोशल मीडिया पर हर बात में हिन्दू – मुस्लमान की लड़ाई लड़ा रही है, हमारे देश में भले है सांप्रदायिक तनाव सडको पर देखने को न मिले किन्तु सोशल मीडिया पर जबरदस्त दंगे चल रहे है, हालत इतनी ख़राब है यहाँ से निकली एक चिंगारी कभी भी सांप्रदायिक दंगो का रूप सड़कों पर ले सकती है. किन्तु सरकार का ध्यान इस ओर बिलकुल नहीं है, सरकार इस मामले को ज़रा भी तरजीह नहीं दे रही है. सोशल मीडिया पर उगले जाने आग भारत के आपसी भाईचारे के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं है. सरकार को इस और ध्यान देना चाहिए की सोशल मीडिया क्या परोसा जा रहा है. और उन लोगो के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए जो इसके लिए जिम्मेदार हैं.

Hindi Movie Raees: सोशल मीडिया ही नहीं न्यूज़ मीडिया भी दाल रहा है दरार : किसी भी देश में न्यूज़ मीडिया एक प्रकार से सामाजिक स्तम्भ माना जाता है वोह समाज की बुराइयों और अच्छाइयों को लोगो के सामने प्रदर्शित करता है. उसकी भूमिका बिलकुल निष्पक्ष और कल्याणकारी होती है. किन्तु फिलहाल के दिनों में न्यूज़ मीडिया को पता नहीं कोनसा अधिकार प्राप्त है की वोह खुले तौर पर देश के दो सम्प्रदायों को लड़ाने की फ़िराक में लगा रहता है. शायद वोह इसलिए करता है की इस प्रकार की खबरें ज्यादा बिकती है और देश की जनता इस प्रकार के मामलों को ज्यादा उत्सुकता से देखती है और अपना वक़्त उन न्यूज़ चैनल पर लगाती है जो इस प्रकार की खबरें प्रदर्शित करता रहता है और अपने विज्ञापन दिखता रहता है ताकि उनकी तो कमाई होती रहे और हमारा सामाजिक भाईचारा ख़राब होता रहे.

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Hindi Movie Raees :आजकल फिल्मो की तारीफे और बुराई भी फिल्म में काम करने वाले अभिनेताओं के धर्म के आधार पर की जा रही है, और हम गर्व से कह रहे है की धार्मिक असहिष्णुता नहीं है.

टीवी चेनलों पर परोसी जा रही है साम्प्रदायिकता :

Hindi Movie Raees : टीवी चेनलों पर आज कल जिस प्रकार की मानसिकता परोसी जा रही है वो भारत के अखंड भविष्य के लिए बिलकुल भी लाभदायक नहीं है. न्यूज़ मीडिया के कुछ चैनल भारत के 14 प्रतिशत मुसलमानों से 75 प्रतिशत हिन्दुओ को डरा रहे है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के मुसलमानों की संलिगता न के बराबर है, सभी आतंकवादी हमले बाहरी शक्तियों जैसे पकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से होते है जिनमे मुस्लिम आबादी अधिक है, अब वहां से कोई हमारे देश में घुसेगा तो वोह मुसलमान ही होगा. अब वोह किसी भी धर्म का हो अगर वोह हमारे देश में कुछ गड़बड़ करता है तो हमारे लिए तो वोह आतंकवादी ही हैं. चाहे उसका कोई भी धर्म हो. और हमारे देश में रह रहे 14 प्रतिशत मुसलामानों को इसके लिए जिम्मेदार समझा नहीं बल्कि बताया जाता है. टीवी चैनल में सबसे सांप्रदायिक मीडिया जी न्यूज़ ने तो यहाँ तक एक प्रोग्राम बना डाला की “कैसे कहें आतंक का कोई धर्म नहीं होता”. अर्थात उसने सीधे सीधे देश के देशभक्त मुसलमानों को भी देश का आतंकवादी घोषित कर दिया. यह उस वक़्त का प्रोग्राम है जब बांग्लादेश में आतंकवादी हमला हुआ था.
आज जिस प्रकार सोशल मीडिया और बिकाऊ न्यूज़ मीडिया अपने सांप्रदायिक मंसूबों को अंजाम दे रहा है. यदि यह लगातार होता रहा तो कहीं ऐसा न हो की हमारा देश सांप्रदायिकता की बारूद पर निकट भविष्य में बैठा मिले, और वोह बारूद फटे तो सब कुछ तबाह हो जाए. पूरानी कहावत है “छोटी छोटी चोट मारते रहने से पानी का मटका आखिर फूट ही जाता है “. जख्मो को कुरदते रहने से जख्म बड़ा ही होता है वोह कभी भरता नहीं. किन्तु हमारे मीडिया को यह बात समझ नहीं आती. वोह इस जख्म को हमेशा के लिए हरा भरा रखना चाहती है ताकि उनकी डॉक्टरी चलती रहे और दवाइयां बिकती रही (लोग उनके चैनल पर अपना समय व्यतीत करते रहे और विज्ञापन देखते रहे).

देश का बड़ा दुश्मन कौन है ?

निसंदेह जब भी कभी बाहरी शक्तियों के कारण हमारे देश में हमला होता है और जब उसमे लोग मारे जाते है तो उसमे मरने वाले कभी किसी एक सम्प्रदाय के नहीं होते उनमे सभी सम्प्रदाय के लोग होते है. यानी सभी भारतीय ही होते है चाहे वोह मुसलमान हो या हिन्दू, सिख या इसाई सभी सम्प्रदाय के लोग उससे आहात होते हैं, हमारे समाज को इस बात को समझना होगा की आतंक का कोई धर्म नहीं होता, अगर आतंकवाद को मुसलमानों से जोड़ कर देखा जाता है तो सरिया, पकिस्तान और अफगानिस्तान में हजारों लोग मारे गए है और लगातार मारे जा रहे है ज़रा हमें सोचना चाहिए की उनका धर्म क्या है ? आतंक का कोई धर्म नहीं होता बल्कि आतंक एक प्रकार से जोर जबरदस्ती करके अपने बात मनवाने का एक तरीका है. जो मुस्लिम बहुल देशों में मुसलमान और हिन्दू बहुल देशों में हिन्दू, यहूदी बहुल देशों में यहूदी, और इसाई बहुल देशों में इसाई सभी कर रहे हैं, मियामार में रोहिंग्या मुसलमानों को बोद्ध धर्म द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है, पकिस्तान में हिन्दुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है, यहूदियों द्वारा फिलिस्तिन्यों को प्रताड़ित किया जा रहा है, अर्थात जहाँ भी बहूल जाती के लोग है वहां अल्पसंख्यक लोगो को प्रताड़ित करने की खबरें आम होती जा रही है. शुक्र है भारत में अभी ऐसे हालत नहीं है किन्तु जिस प्रकार से राजनितिक पार्टियों और धर्म के ठेकेदारों द्वारा देश में माहौल बनाया जा रहा है, यह ठीक उस दिशा में जा रहा है जिस दिशा में मानवता को ख़त्म कर आतंकवाद को प्रदर्शित करेगी. यदि इस इस्थिति को रोका नहीं गया तो वोह दिन दूर नहीं जब भारत में मुसलामानों, सिखों, ईसाईयों और बाकी अल्पसंख्यक समुदाय को प्रताड़ित किया जाने लगे. अर्थात साम्प्रदायिकता या संप्रदाय एकजुटता ही हमारे देश का बड़ा दुश्मन है, और हमारे नेता संप्रदाय और जाती को एकजुट कर के ही चुनाव लड़ रहे है और संप्रदाय एकजुटता बढ़ावा दे रहे है .

यदि हमने साम्प्रदायिकत पर विजय पा कर मानवता को गले लगाने का जज्बा आज से ही अपना लिया तो हमारे देश को कोई भी विश्व की महान शक्ति बन्ने से नहीं रोक सकता. आजकल देश के बड़े बड़े नेता भारत को विश्वपटल पर विश्वशक्ति के रूप में प्रदर्शित करने का सपना देख रहे है किन्तु वोह यह भूल रहे है की जबतक भारत की अन्दर की जड़ को मज़बूत नहीं करेंगे तब हमारा यह सपना सिर्फ सपना ही रहेगा.

साम्प्रदायिकता को कैसे कम किया जा सकता है

इसके लिए सोशल मीडिया पर साम्प्रदायिकता पर रोक लगानी होगी.
हिंदी समाचार चैनलों को इस बात के लिए जागरूक करना होगा की, किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम न चलायें.
सबसे ज़रूरी बात देश के नेताओ को अपना हित अलग रखकर देश हित में सोचना होगा. सबका साथ सबका विकास सिर्फ जुमला न होकत हकीकत बनाना होगा.
पुरे देश में सम्प्रदिय्कता को मिटाने वाले कार्यक्रम चलने होंगे. आपसी सहयोग बढ़ाना होगा. और यह काम सरकार को करना चाहिए.
जिस प्रकार सरकार अपने कामों को टीवी चैनल के द्वारा विज्ञापन के द्वारा लोगो को दिखाती है उसी प्रकार आपसी भाई चारे को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन और कार्यक्रम चलाने होंगे.
सरकार द्वारा देशव्यापी आयोजन किये जाने चाहिए, जिससे आपसी भाईचारे को बढ़ावा मिले .
स्कूल और कॉलेज में इस विषय पर एक नया सब्जेक्ट लाना चाहिए जिसमे आपसी भाईचारे की शिक्षा प्रदान की जा सके.
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