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Demonetization-नोटबंदी के एक महीने बाद भारत हालात

Demonetization-नोटबंदी के एक महीने बाद भारत हालात
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Demonetization-नोटबंदी के एक महीने बाद भारत हालात

Demonetization-नोटबंदी को आज पूरा एक महिना हो चूका है, 9 नवम्बर 2016 की सुबह भारत के इतिहास में एक ऐसी सुबह थी, जब देश के हर हिस्से के नागरिक प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अचानक 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए जाने के कारण लाइन में खड़े हो गए और आज एक महीने बाद भी बैंकों की कतार में खड़े है |

काला धन, भ्रष्टाचार और आतंकवाद के खात्मे के लिए देश के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक एतिहासिक फैसला लिया था, और देश की ज्यादातर जनता ने देश की उन्नति के लिए इसे एक अच्छा कदम बताया है | आज एक महीना गुजर जाने के बाद हम विश्लेषण करते है की एक महीने बाद देश में क्या परिवर्तन आया है, हालाँकि प्रधान मंत्री मोदी ने देश की जनता से अपने इस निर्णय को सही साबित करने के लिए 50 दिन का समय माँगा था और कहा था की बस 50 दिन जनता थोड़ी तकलीफ उठा ले | उसके बाद भारत को स्वर्ग बन्ने से कोई नहीं रोक सकता |

एक महीने बाद आज हर कोई इस फैसले का आंकलन कर रहा है की इससे कितना फ़ायदा या नुक्सान हुआ है | क्योंकि देश की अधिकतर जनता ने इस फैसले का समर्थन किया था और एक उम्मीद जगाई थी की अब सब कुछ ठीक हो जाना चाहिए | क्योंकि इस महीने में जितनी परेशानी देश की गरीब जनता ने उठाई है उतनी किसी ने नहीं क्योंकि इस दौरान यह देखने में आया की देश का कोई नेता बैंक की लाइन में घंटों तक खड़ा नहीं रहा, खड़ी रही तो वोह थी देश की जनता| किसी उद्योगपति या किसी सेलेब्रिटी को बैंक की लाइन में नहीं देखा गया | हाँ कुछ अपवाद ज़रूर थे मगर जनता यह समझ चुकी थी की यह वोट की राजनीती का एक हिस्सा है | मगर बड़ी आशाएं आज भी जनता की सरकार से लगी हुई है, क्योंकि देश की जनता ने आजादी के बाद पहली बार इतना बड़ा बलिदान दिया है की परेशानी होते हुए भी उसने इसे स्वीकार किया इस उम्मीद से की अब तो अच्छे दिन आएंगे | मैं भी यही आशा करता हूँ की 50 दिन के बाद देश की जनता को कुछ राहत ज़रूर मिल जानी चाहिए |

सरकार ने जनता से कुछ समय परेशानी उठाने को कहा था और जनता ने भी अपना धेर्य बनाए रखा है, यह देश की जनता की देशभक्ति ही है की इतनी परेशानियों के बावजूद आज भी जनता सरकार के फैसले के साथ खड़ी है| जनता का ऐसा धेर्य आजादी के बाद पहली बार देखा गया है वरना छोटे छोटे मुद्दों पर देश की जनता आन्दोलन खड़ा कर देती है ऐसा भूतकाल में देखा गया है | देश की लोगों ने अपना कर्तव्य निभा दिया है और अब बारी सरकार की है, देश की जनता सरकार की तरफ बड़ी आशा भरी निगाहों से देख रही है |

इस एक महीने में क्या अच्छा हुआ ?

बेईमान लोगों की तिजोरियों में पड़ा काला धन निकल कर बहार आया |
मंदी की मार छेल रहे बेंकों में अचानक खूब पैसा जमा हो गया | जिसके कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, इससे बेंको के हालात सुधरेंगे |
प्लास्टिक मनी का प्रचलन बढ़ा है और लोग लेने देन के आधुनिक तरीकों को अपनाने लगे है |
ऑनलाइन वॉलेट कंपनियों को अच्छा स्टार्टअप मिल गया है जिसमे paytm को अच्छा मुनाफा हुआ है और उसका टर्न ओवर लाखो से करोडो में पहुच गया है |
देश का खजाना भरा है जो देश के विकास में काम आएगा |
भारत की अर्थव्यवस्था को कैशलेस बनाने की प्रक्रिया शरू हो चुकी है जिसकी तहत लोगों को प्लास्टिक मनी के ज़रिये व्यापार और लेन देन करने में आसानी होगी, जिसके कारण भारी रकम इधर से उधर ले जाने में किसी प्रकार का खतरा नहीं होगा |
जिन logon के पास बैंक खाता नहीं था उन्हें भी बैंकों से जोड़ा जा रहा है और उन्हें रूपए डेबिट कार्ड दिया जा रहा है ताकि वोह भविष्य में प्लास्टिक मनी (plastic money) का इस्तेमाल कर विकसित हो रहे देश के साथ चल सकें |
इस एक महीने में क्या परेशानियाँ रही ?

Demonetization का सबसे पहला असर यह हुआ की लोग अपनी पुरानी मुद्रा 500 और 1000 के नोट बदलवाने के लिए बेंकों के सामने उमड़ पड़े और जो भीड़ के कारण नहीं बदलवा सके वोह आज भी अपने नोट बदलवाने के लिए कोई न कोई जतन कर रहे है जबकि अब नोट बदले नहीं जा रहे है | सिर्फ अपने खाते में ही जमा किये जा सकते है |
बेंको के सामने लम्बी लम्बी कतरे लगने लगी जो आज भी जारी है जबकि एक महिना गुजर चूका है | हालाँकि शहरों में हालत अब थोड़े सुधरे है |
Demonetization/नोटबंदी के कारन लाइन खड़े खड़े एक महीने में 84 लोगों की मौत इस एक महीने में हो चुकी है |
इस एक महीने में वोह लोग ज्यादा परेशां रहे जिनके पास किसी बैंक का कोई खाता नहीं था |
अमीर लोगों को इस नोटबंदी से ज्यादा परेशानी नहीं हुई क्यूंकि हर अमीर के पास प्लास्टिक मनी के तौर पर एटीएम या डेबिट या क्रेडिट कार्ड था उसने अपना काम उसके ज़रिये चलाया |
Demonetization का व्यापक असर देखा गया और हालत को काबू में रखने के लिए हर रोज़ नए नए फैसले लिए |
जब हालात काबू से बहार आने लगे तो सरकार ने कैशलेस मनी पर बल दिया | जिसके कारण ऑनलाइन वॉलेट वाली प्राइवेट कंपनियों को भारी मुनाफा हुआ |
बार – बार सरकार द्वारा नोट बदलने या निकलने की रकम कितनी होनी चाहिए इस फैसले को बदलते देखा गया |
जिन परिवारों में शादियाँ थी उनका बहूत बुरा हाल था, क्यूकी ज़रूरत के मुताबिक पैसा नहीं निकल पा रहा था | शायद नोटबंदी का ऐलान करते वक़्त सरकार का ध्यान इस और नहीं गया होगा की शादी वाले घरों में पैसे की ज़रूरत पड़ेगी इसलिए जब यह समस्या सामने आयी तब सरकार ने शादी के लिए 2.5 लाख देने की घोषणा की, मगर सभी जगह लोगों को यह रकम नहीं मिली क्यूंकि बैंकों में कैश की किल्लत चल रही है |

Demonetization: इस महीने में किसानो को दो तरफ़ा मार पड़ी एक तो जो फसल उनकी खलिहानों में पड़ी थी पैसे की कमी के कारण वह उचित दाम पर नहीं बिक पायी और ख़राब हो गयी, दूसरा नयी फसल की बुवाई के लिए उसके पास नकद पैसा नहीं होने के कारण वोह हर बार की तरह फसल की तैयारी नहीं कर सका आज भी गाँव और देहात में बुरे हालात है | हालाँकि सरकार ने किसानो के लिए नाबार्ड के ज़रिये काफी हद तक रहत देने की कोशिश की है | मगर समस्याएं अभी भी बरक़रार है जिन्हें सुधरने में और समय लगेगा |
जिन 84 लोगों की मरने की खबरें है उनमे कुछ किसान भी है |, ज्यादातर मौतें खड़े खड़े परेशानी के कारण हुई, कुछ ने आत्म हत्याएं भी की | थोड़ी सुकून वाली बात रही की लोगों ने आपसी भाईचारा बनाये रखा और कोई अप्रिय घटना या लड़ाई झगडा की बड़ी घटना नहीं हुई |
नोटबंदी से पुरे भारत में व्यापार जगत को भरी नुकसान उठाना पड़ा, शरू के २० दिन में व्यापार 50 प्रतिशत तक रह गया, अब हालत धीरे धीरे सुधर रहे है |
Demonetization : लाखों मजदूरों का काम छूट गया, देखा गया की जिन फक्ट्रियों में मजदूर काम करते थे वहां इस महीने काम नहीं होने के कारण मालिकों ने मजदूरों को घर बैठने को कह दिया, क्योंकि नोट की कमी के कारण फेक्टरी को भी आगे से काम नहीं मिल रहा है |
जो लोग इस भीडभाड में जैसे तैसे अपने पैसे बदलवाने में कामयाब रहे या बैंक से अपना पैसे निकलवाने में कामयाब रहे उन्हें भी बाज़ार में आकर परेशानिया उठानी पड़ी, क्यूंकि बैंक ने नया 2000 हज़ार का नोट दिया जो की अभी तक भारत की सबसे बड़ी मुद्रा है, लोग इसके खुल्ले नहीं करवा पर रहे है, अगर किसी व्यक्ति को १०० रूपए का सामान खरीदा है तो उसे कोई खुल्ले पैसे नहीं दे रहा है, जिसके कारण वोह एक दूकान से दूसरी दूकान और दूसरी से तीसरी दूकान चक्कर लगा रहा है |
देश के लिए नुक्सान देह बात यह रही की देश GDP अब गिर गयी है है और कुछ समय के लिए यह इसी स्तर पर बनी रह सकती है, जो देश के विकास के लिए अच्छी खबर नहीं है |
Demonetization : आतंकवाद के खात्मे के लिए यह कदम उठाया गया किन्तु एक के बाद एक भारतीय सीमा पर आतंकी हमले होते रहे और पिछले साल के मुकाबले इस साल इन की संख्या पहले से बढ़ गयी | पिछले साल के मुकाबले इस साल हमारे सेना के जवान ज्यादा शहीद हुए |

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भ्रस्टाचार की रोकथाम के लिए कदम उठाया गया मगर इसमें भी कोई कमी नहीं आयी, नोटबंदी के पहले हफ्ते में ही बेईमान सरकारी कर्मचारियों को नए नोट में रिश्वत लेने का मामला सामने आया |
एक महीने से संसद का काम काज बंद पड़ा है, विपक्षी पार्टियाँ ने सरकार को चारों तरफ से घेर रखा है और नोटबंदी को वापस लेने पर अड़ी हुई है |
इन सब के बावजूद हम आशा करते है की सबकुछ जल्दी ही सामान्य हो जायेगा | और भारत देश निसंदेह एक विकसित देश बनकर उभरेगा |

जय हिन्द

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