HomeGuest Posts 0 views

नोटबंदी के बाद आम जनता को फ़ायदा

नोटबंदी के बाद आम जनता को फ़ायदा
Like Tweet Pin it Share Share Email

नोटबंदी पर मंथन :

नोटबंदी को एक महीना से ऊपर हो गया है, जो भी ज़मीनी हकीक़त है वो तो आपको मालूम है इसलिए उस पर बात न करकर मुख्य बिंदु पर बात करते है | देश में तरह तरह के लोग है और और सबका नजरिया भी अलग अलग है | मगर सब में एक बात एक जैसी है की नोटबंदी के बाद उपजे हालत से सब कहीं न कहीं चिंतित अवश्य है क्यूंकि यह हालात हर भारतीय के जीवन और दिनचर्या से जरूर जुड़े है| अब कोई राजनीती से प्रेरित व्याक्ति होगा तो हो सकता है मेरी बात से सहमत न हो | इस नोटबंदी को जिस प्रकार मैंने मंथन और पड़ताल की है वोह कुछ इस प्रकार है |

सरकार के अनुसार नोटबंदी की मुख्य वजह काला धन, भ्रस्टाचार और आतंकवाद की रोकथाम है | मगर मेरे नज़रिए से देख जाए तो इन तीनो क्षेत्रो में है अभी तक किसी प्रकार की कोई कमी तो क्या किसी भी प्रकार का डर भी नहीं देखा गया क्यूंकि :

१. बैंकों में जमा जनता के धन में से कितना काला धन है इसकी अभी तक कोई आहट तक नहीं है |

२. भ्रष्टाचार की बात करें तो यह घटनाएं सरकार की सख्ती और नोट बंदी के बावजूद लोगो के पास नए नोटों को मिलने के रूप में सामने आ रही है | तो यह कहना की भ्रस्ताचार पर रोक लगी है यह सिर्फ एक कहावत सी लग रही है |

३. आतंकवाद की बात करें तो आतंकवादी हमले पहले से ज्यादा और बार बार हो रहे है और आतंकियों के पास भी सरकार की सख्ती के बावजूद नए नोट मिल रहे है |यानी तीनो जगह पर हम फ़ैल हो रहे है |

चलिए अब बात करते है नोटबंदी के बाद आम जनता हो होने वाले फायदे की

चलिए यह मान भी लिया जाए की नोटबंदी से बहूत सा धन सरकार के पास आ जायेगा और सरकार उसे देश हित में खर्च भी करेगी और करना भी पड़ेगा | क्यूंकि 50 दिन बाद जनता की सरकार से बहूत सी आशाएं है | जैसे :

१. ब्याज दर कम होगी |

२. पेट्रोल डीजल के भाव आधे हो जाने चाहिए |

३. महगाई कम होगी |

४. ज़रूरी सामान की किल्लत कम होगी

5. बिजली पानी की दरों में कमी होना चाहिए

६. हर भारतीय नोजवान के पास रोज़गार होना चाहिये

७. शहरों और गाँवों में विकास कार्य होने चाहिये इत्यादि बहूत सी आशाएं है जो देश की जनता नोटबंदी के बाद अपने इस त्याग और बलिदान का बदला चाहेगी |

चलो यह मान भी लिया जाए की नोटबंदी कामयाब होगी और 50 दिनों बाद काला धन निकलकर सामने भी जायेगा तो क्या यह धन जनता की उपरोक्त आशाओं और मांगों के लिए पर्याप्त होगा | मुझे लगता है की जनता की आशाओं के लिए बिलकुल अप्ल्पांश की तरह होगा | ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार आज हमें हमारे चारों और विकास दिखाई देता है उससे थोडा बहूत बाद सकता है मगर होगा ऐसा ही और यदि ऐसा ही विकास नोटबंदी के बाद भी हो तो फिर नोटबंदी कर आम जनता को परेशान कर उनसे बलिदान मांगने का क्या तात्पर्य है | ये मेरी समझ से परे है यदि आपकी समझ में आता है तो निचे कोम्मेट्स बॉक्स में बताइए मैं भी आपकी बात पर एक बार फिर से चिंतन करूँगा |

नोटबंदी कब आवश्यक हो जाती है : किसी भी देश में नोटबंदी तब आवश्यक हो जाती है जब देश की कुल मुद्रा की ३० से 50 प्रतिशत मुद्रा जाली पाई जाए अर्थात बाज़ार में नकली नोटों को प्रचलन बढ़ जाता है और इससे देश को भारी नुक्सान होता है | या फिर जाली नोट को फैलाने वाले लोग जाली नोटों को बाज़ार में चला दे और असली नोटों का भण्डारण अपने पास करते रहे | और यह स्थिति यहाँ तक पहुच जाए की बाज़ार में असली नोटों की कमी पड़ने लगे जिससे देश की आर्थिक स्थिति कमज़ोर होने का खतरा हो | उस समय नोटबंदी कर देना परम आवश्यक हो जाता है | आज भले ही नोटबंदी के पीछे सरकार की मंशा ठीक हो किन्तु इसे लागू करने का तरीका बिलकुल भी सही नहीं था, मुझे लगता है सरकार के पास किसी प्रकार की कोई योजना ही है नहीं थी, नोटबंदी के बाद सरकार ने अपने नियम बदले, कभी पुराने नोट यहाँ चलेंगे कभी यहाँ नहीं चलेंगे, कभी इतने नोट बदलेंगे कभी इतने नहीं बदलेंगे, कभी इतना मिलेगा, कभी नहीं मिलेगा, कभी यह शर्त पूरी होना चाहिए कभी और दूसरा विकल्प होना चाहिए | आज बैंक मैं नकदी है तो कल नहीं है आज पैसे यहाँ से मिलेगे कल से बिग बाज़ार से मिलेगे, हां यह बात भी समझ नहीं आई की जब जनता बैंक में लाइन में खड़ी है तो कहा जाता है की नकदी नहीं है दूसरी और बिग बाज़ार से नकदी दी जा रही है जबकि बिग बाज़ार एक प्राइवेट आर्गेनाइजेशन है उसका बैंक के काम काज से क्या मतलब, यदि सरकार बैंकों में सही प्रकार से पैसा पहुचाती तो लोगों की भीड़ जल्दी ही छट जाती | बात कहने में बुरी लग रही है मगर सच है बिग बाज़ार की व्यवस्था अमीर लोगों को ध्यान में रख कर की गयी होगी ताकि उनको फायदा पहुचता रहे और गरीब बैंकों की लाइन में मरता रहे | क्या समझदारी है ?

क्या नोटबंदी से सारा काला धन वापस जायेगा ?

आपको याद है तो में बताता चालू की पिछले साल ही सरकार ने काला धन रखने वालों के लिए एक लुभावनी स्कीम चलाई थी की कुछ प्रतिशत सरकार को दे दीजिये उसके बाद बाकी का सारा काला धन आपका सफ़ेद हो जायेगा | यही वोह समय था जब जायदातर काला धन वालों ने सरकार के सामने अपना काला धन उजागर किया जिससे ३००० करोड़ से अधिक राजस्व सरकार के पास आया | अब रह गए सिर्फ गिने चुने लोग, कुछ समाज कंटक लोग और देश के बड़े बड़े उद्योग पति |उसपर भी जिन लोगों के पास कालाधन वोह नकद कम और एसेट्स के रूप में ज्यादा है, किसी के पास अथाह जमीन है, किसी के पास बहूत सा सोना है, प्लाट है, कई – कई मकान है और कुछ लोगों ने ऐसे बिज़नस में लगाया हुआ होगा जिसका हिसाब भी माँगा जाए तो महीनो गुजर जायेंगे तो भी सही प्रकार से पता नहीं लगाया जा सकता की किसके पास क्या क्या है, उनसे काला धन निकलवाने के लिए 50 दिन के लिए पुरे भारत में नोटबंदी करके भारतीय अर्थव्यवस्था को पीछे धकेल देना मेरी नज़र में कोई समझ्धारी नहीं है | क्यूंकि इनमे से ज्यादातर के पास जो काला धन है वोह तो विदेश में जमा है | जिसे वापिस लाना और देश में नोटबंदी करना दोनों में किसी प्रकार का सामजस्य ही नहीं बनता | देश में जो भी धन है चाहे वोह काला हो या सफ़ेद, है तो देश में ही और किसी न किसी तरह इधर उधर कभी न कभी तो काम आ ही रहा था, मगर नोटबंदी के बाद लोगों ने अपने आप को बचने के लिए भारतीय मुद्रा को नदियों में बहा दिया किसी ने जला दिया, किसी ने नष्ट कर दिया जिससे देश की मुद्रा कम हो गयी और देश को नुक्सान हुआ | मेरी नज़र में नोटबंदी से काला धन वापिस आयेगा ऐसी कल्पना करना या तो कम समझ्धारी है या अपनी मनमानी को जनता पर जबरदस्ती लागू कर देना किसी और रास्तें की तरफ इशारा करता है |

यह भी पढ़ें  काला धन उजागर करने के लिए मोदी ने किये नोट बंद

अगर वाकई हम काला धन के लिए चिंतित है तो हमें अपने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ताकतवर बनाना चाहिए था, जो लोग इस विभाग में उदासीन है उनकी जगह नए उर्जावान और कर्मठ लोगों का लगाना चाहिए था, जो कालाधन पर एक मुहीम चलाकर देश से सारा धन वापिस निकाल लेते और उनकी दहशत से भविष्य में लोग इस अपराध से बचने का संकल्प लेते | और देश की जनता को अपना सब कुछ छोड़कर बैंकों की लाइन में अपने दिन नहीं गुजारने पड़ते, अपनी जाने नहीं देनी पड़ती | कुछ लोग इलाज़ के लिए पैसे लेने बैंक गए और वही मर गए, कुछ बीमार हो गए और आज भी यही सिलसिला चल रहा है, पता नहीं कब हालत सामान्य होंगे |

मुझे एक कहावत याद आ रही है ” एक जंगल में राजा के सामने 5 जानवरों को पकड़ कर लाया गया और सिपाही ने राजा से कहा महाराज इन 5 में से 2 चोर हैं, मगर हम यह पता नहीं लगा पा रहे है की वह २ कौन है, जंगल का राजा बहूत सम्झ्धार था वो समझ गया क्या करना चाहिए | उसने तुरंत हुक्म दिया ” सिपाही जाओ और इन सभी को मार दो, जो चोर होगा उसे अपने आप सजा मिल जाएगी, राजा का आदेश था इसलिए सिपाही ने सभी को मार दिया |

आज हमारे साथ भी ऐसा ही हुआ है कुछ चोरों की वज़ह से हम सब को यह सजा मिल रही है की हमारे बुजुर्ग लाइन में खड़े खड़े मर रहे है और हम कुछ कर भी नहीं सकते क्यूंकि देश के राजा का फरमान है |

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए नोटबंदी : सत्ता में आते ही सरकार ने एक अच्छी योजना बनाई डिजिटल इंडिया प्रोग्राम |किन्तु यह उतनी चर्चा का विषय नहीं बन सकी जिसकी सरकार कल्पना कर रही थी क्यूंकि पहले से भारत डिजिटल दुनिया की और अग्रसर है और पिछले कुछ सालों में उसने स्वत ही खूब तरक्की की है, यह प्रोग्रम भी उसी तरह फ़ैल हुआ जिस प्रकार स्वच्छ भारत अभियान, क्योंकि वास्तविकता यही है की स्वच्छ भारत अभियान सरकारी कागजों और रिजर्व बैंक के नोटों तक ही सिमित रह गया है | जबकि हमारी सड़के, गलियारे, शहर, गाँव, मोहल्ले, आज भी कचरे से भरे पड़े है | तसवीरें खिचवाने के लिए लोगों कुछ समय झाड़ू हाथ में उठाये और आज कोई नज़र नहीं आता | ठीक उसी प्रकार डिजिटल इंडिया का हाल था | नोटबंदी के बाद जब सरकार ने कैशलेस अर्थव्यवस्था की का बात सामने रखी और इस पर अधिक बल दिया तो नोटबंदी का खेल समझ में आया |

नोटबंदी की मार झेल रहे भारत में जैसे ही बैंकों में कुछ पैसा जमा हुआ तो सरकार ने उन उद्योगपतियों के क़र्ज़ को दरकिनार करते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया की इस क़र्ज़ को अब वसूल नहीं किया जा सकता एक प्रकार से उन्हें छूट दे दी | इनमे कुछ उद्योग पति ऐसे है जो कभी राजनितिक पार्टियों को चुनाव के लिए फण्ड मुहैया करवाया करते थे | इनमे से विजय माल्या का नाम सबसे ऊपर है जिसे भारत सरकार ने भगोड़ा घोषित किया हुआ है | इन उद्योगपतियों से राजनेतिक दबाव के कारण पैसा वसूल नहीं कर पाने के कारण बैंकों की हालत बिलकुल ख़राब हो चुकी थी, बैंकों के हालात सही करने के लिए नोटबंदी को को लागू कर आम जनता को परेशान करना कहा तक उचित है यह तो देश के बड़े बड़े नेता ही समझा सकते है | कैशलेस इकोनोमी यदि जनता की चाहत से आये तो क्या बात है, मज़ा आ जाये लेकिन अगर यह जबरदस्ती उसपर थोपी जाये तो इसके मायने क्या होने चाहिए यह किसी को समझाने की आवश्यकता नहीं है | नोटबंदी की परेशानी के कारण आज हम और आप कैशलेस इकोनोमी का हिस्सा बनने के लिए मजबूर है | क्यूंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो हमारी ज़रूरते पूरी करने में और अधिक परेशानी होगी, हालाँकि आज हमें कैशलेस होने पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं देना पड़ रहा है क्यूंकि फिलहाल कैश की कमी के कारण हमें इसकी छूट है | किन्तु जैसे ही नोटबंदी का असर ख़त्म होगा तब तक हम कैशलेस के आदि हो जायेंगे और हमें कैशलेस लेन देन करने पर सेवा प्रदाता बैंकों और कंपनियों को टैक्स के रूप में अथवा सर्विस चार्ज के रूप में कुछ राशी देनी होगी, आज हम कैश के साथ किसी भी लेन देन में किसी को एक भी पैसे ज्यादा नहीं देते है, मगर प्लास्टिक मनी या कैशलेस सुविधा लेने के लिए हमें अतिरिक्त भुक्तान करना होगा | हर ट्रांजेक्शन पर 2.80 प्रतिशत चार्ज होता है उससे जनता का तो नुक्सान होगा किन्तु बैंकों और सर्विस प्रोवाइड करने वाली कंपनी को फायदा होगा | जैसे अभी paytm या और दूसरी कंपनियों को हो रहा है | नोटबंदी के दौरान इनका टर्नओवर लाखों से अरबों में पहुच गया है और भविष्य में भी यह कंपनियां और बैंक मुनाफा कमाते रहेंगे | हम लोग पहले से ही हर प्रकार का टैक्स दे रहे है, जो GST के बाद एक हो जायेगा और फिर हम ट्रांजेक्शन के लिए भी टैक्स या सर्विस चार्ज देंगे और इसकी ट्रांजेक्शन संख्या ज्यादा होगी हर रोज़ हम कुछ न कुछ खरीदते ही है | जितने बार ट्रांजेक्शन होगा सर्विस चार्ज लगेगा, अर्थात हर ट्रांजेक्शन या खरीददारी पर हमको कीमत से 2.80 प्रतिशत ज्यादा पैसा खर्च करना होगा |

इसलिए मैंने अपने लेख में शुरू में ही लिखा है, नोटबंदी का मकसद काला धन नहीं अपितु बैंकों को फायदा पहुचने के लिए उठाया गया कदम है | फिर भी सरकार ने 50 दिन मांगे है और 33 दिन गुजर चुके है, बस 17 दिन बाकी है | उम्मीद है भारत की जनता को नोटबंदी से राहत मिल जाएगी में ऐसी दुआ करता हूँ |

GUEST POST BY:

zaki ansari

ZAKI ANSARI

Writer•Director• Actor

Comments (0)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *