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Bheem Sena at Jantar Mantar- 50 हज़ार से ज्यादा दलितों के प्रदर्शन को मीडिया ने दबा दिया

Bheem Sena at Jantar Mantar- 50 हज़ार से ज्यादा दलितों के प्रदर्शन को मीडिया ने दबा दिया
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Bheem Sena at Jantar Mantar : आपको याद होगा कुछ समय पहले की ही बात है जब जंतर मंतर पर अन्ना हजारे ने एक आन्दोलन किया था. उस समय पूरा राष्ट्रीय मीडिया वहां पर जमा हुआ था. हर मिनिट की खबर न्यूज़ मीडिया पर दिखाई जा रही थी. उस वक़्त भी 50 हज़ार के आस पास जनसमूह इकठ्ठा हुआ था और मीडिया ने उसको खूब तवज्जो दी. जिससे कई नए नेता उभर का सामने आये.

ठीक वैसा है 21 मई २०१७ को हुआ जगह भी वही थी लोग भी उतने ही थे. पहले भी लोग अन्याय के खिलाफ जमा हुए थे आज भी जमा हुए. फर्क सिर्फ इतना रह गया की अन्ना का आन्दोलन उस समय की विपक्षी राजनितिक दलों की देख रेख में हुआ. जिसके कारण वोह राष्ट्रीय मुद्दा बन गया, पक्षपाती मीडिया ने उस समय विपक्षी दलों का साथ दिया और उसकी राष्ट्रिय स्तर पर कवरेज की गयी.

आज भी लोग जमा हुए, मुद्दा भी जनता और उसकी सुरक्षा को लेकर था किन्तु हमारे मीडिया ने उसे नहीं दिखाया, दिखाना तो दूर किसी भी बड़े भारतीय न्यूज़  चैनल का कोई पत्रकार भी मौजूद नहीं था. जबकि विदेशी मीडिया मौजूद था. और उन्होंने इस प्रदर्शन को विदेशो में लाइव दिखाया. 50 हज़ार से ज्यादा का जन समूह जंतर मंतर पर अपने हक और सुरक्षा के लिए जमा हुआ. विदेशी मीडिया ने इसमें दिलचस्पी ली किन्तु भारतीय मीडिया ने इस खबर की पूरी कवरेज नहीं करने का फैसला लिया.

भारतीय मीडिया ने ऐसा क्यूं किया यह लोग सब समझते है. और किसके इशारे पर भारतीय मीडिया ने अपने कैमरे बंद कर लिए यह भी सब जानते है. हाँ जो छोटी मोटी फुटेज भारतीय मीडिया ने अपने कार्यक्रमों में खाना पूर्ति करने के लिए दिखाई वोह भी सोशल मीडिया पर अपलोड किये गए फुटेज से ली गयी.

Bheem Sena at Jantar Mantar

भारतीय मीडिया ने इस खबर को शायद इसलिए नहीं दिखाया की भारत के कमज़ोर वर्ग के लोग शायद उन्हें क्या आर्थिक मदद देंगे. या यूं कहें की भारतीय मीडिया भी दलितों और मुसलमानों के मुद्दों को मुद्दा नहीं मानते. या शायद उनपर दक्षिण कोरिया के राजा की तरह उन्हें स्वतंत्र पत्रकारिता नहीं करने की धमकी मिली हो.

जंतर मंतर पर 50 हज़ार से ज्यादा दलित समाज के लोग इकठा हुए और उनमे एक संगठन का नाम उभर का सामने आया वह है भीम सेना.

भीम सेना सहारनपुर के दंगो के बाद अचानक बना एक दलित संगठन है. जो दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करना चाहता है. किन्तु भारतीय मीडिया की और से उसे कोई तरजीह नहीं दी जा रही. भीम सेना में अचानक एक हफ्ते में इतने कार्यकर्ता जमा हो जाना भारतीय राजनीति को एक अलग परिभाषा और पहचान दे गया. जो भारत में इससे पहले कभी नहीं हुआ. किसी भी राजनितिक पार्टी या सामाजिक संगठन में एक साथ इतने लोग नहीं जुटे  जितने भीम सेना ने जुटा लिए.

Bheem Sena at Jantar Mantar

अर्थात साफ़ तौर पर कहा जा सकता है. भारत के लोग अब तक चलती आ रही राजनितिक पार्टियों से परेशान है. और वह बदलाव चाहते है. यदि भीम सेना उग्र संघठन बना तो जल्द ही ख़त्म हो जायेगा और यदि भीम सेना दलितों के लिए लड़ा तो मायावती जैसे नेताओ की छुट्टी समझो.

भीम सेना का जंतर मंतर पर प्रदर्शन में सहारनपुर से ही नहीं बल्कि अलग अलग प्रान्तों से लोग आकर जमा हुए जिसका मतलब साफ़ है की लोग उपेक्षित महसूस कर रहे है और सरकार को चेताना  चाहते है की मौजूदा सरकार सिर्फ कुछ ख़ास लोगों का ख्याल रख रही है.

भीम सेना का कहना है कि : 

सहारनपुर हिंसा के बाद अगड़ी जाति के लोगों को हथियारों के साथ प्रदर्शन की इजाजत दी गई जबकि दलितों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से भी रोका गया.

प्रशासन और सरकार के स्तर पर ये दोहरा बर्ताव दिख रहा है.

जनांदोलन और इन संगठनों के रूप में दलितों का जो उभार हो रहा है, उससे राजनीतिक दल अपने तौर तरीकों में बदलाव लाने पर विवश होंगे.

देश भर में दलितों के साथ जो कुछ हो रहा है, भीम सेना केवल उसका एक हिस्सा है.

गुजरात में गाय के नाम पर दलितों के साथ जो कथित ज़्यादतियां हुईं, उससे दलित उग्र विरोध करने पर विवश हो रहे हैं, फिर ये मामले चाहे गुजरात या फिर झारखंड के हों.

Bheem Sena at Jantar Mantar

जिस प्रकार दलितों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया  उससे मुख्य धारा की राजनितिक पार्टिया  दलितों और पिछड़ी जातियों , अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सचेत होंगी. और इस और  काम करेंगी ऐसी सिर्फ कामना की जा सकती है. विश्वाश के साथ नहीं कहा जा सकता की  जुमलो की राजनीती करने वाली मोजुदा राजनितिक दल इस और काम करेंगे. क्यूंकि राजनितिक पार्टियों को पिछड़ी जातियां और लोग सिर्फ चुनाव के समय याद आते है. चुनाव जीत जाने के बाद नेता भूल जाते है की उन्होंने क्या वादे  किये थे. 

लोग आज तक अच्छे दिनों का इंतज़ार कर रहे है.

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